न्यूज़ PCMC के अनुसार, पर्यावरण विशेषज्ञों ने दावा किया है कि पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका (PCMC) की रावेत में प्रस्तावित कचरा-ऊर्जा परियोजना देहूरोड गोला-बारूद कारखाने के 'रेड ज़ोन' में आती है। इससे परियोजना की सुरक्षा और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है।
यह प्रस्तावित परियोजना रावेत के सर्वे क्रमांक १७४, १५८ और १५९ की भूमि पर है, जो एमआईडीसी के स्वामित्व में है। यह जगह PCMC के जल शोधन केंद्र के पास, सनराइज-सनसेट पॉइंट और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मार्ग के नजदीक है। परियोजना के दक्षिण में मुंबई-बेंगलुरु महामार्ग (NH-४८) है और महामार्ग के उस पार देहूरोड गोला-बारूद कारखाने की सुरक्षा दीवार है। परियोजना स्थल और कारखाने की दीवार के बीच की दूरी लगभग २०० से ३०० मीटर है।
पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. विजयकुमार पाटिल के अनुसार, गोला-बारूद कारखाने की सुरक्षा दीवार से २००० मीटर (या पुराने माप के अनुसार २००० गज) के दायरे में निर्माण कार्य प्रतिबंधित है। इसलिए इस परियोजना के लिए रक्षा मंत्रालय की अनुमति आवश्यक है और 'रेड ज़ोन' की सीमा को सटीक रूप से निर्धारित करना महत्वपूर्ण है।
राज्य भूमि अभिलेख विभाग ने जुलाई २०२५ में उपग्रह के माध्यम से 'रेड ज़ोन' की सीमा निर्धारित करने के लिए सर्वेक्षण पूरा किया था और उसका नक्शा PCMC को प्रस्तुत किया था। हालांकि, रक्षा मंत्रालय की मंजूरी के अभाव में यह नक्शा अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। इस वजह से 'रेड ज़ोन' की सटीक सीमा स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
इस परियोजना को लेकर स्थानीय निवासियों ने भी चिंता व्यक्त की है। इस क्षेत्र में घनी आबादी है और परियोजना पवना नदी के साथ-साथ जल शोधन केंद्र के पास है। निवासियों को परियोजना से निकलने वाले प्रदूषकों, दुर्गंध और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का डर है। वर्तमान में PCMC का मोशी कचरा डिपो स्थित १४ मेगावाट का कचरा-ऊर्जा परियोजना बंद पड़ी है।












