पिंपरी चिंचवड एजुकेशन ट्रस्ट के एस. बी. पाटिल कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर एंड डिजाइन, आकुर्डी में हाल ही में वास्तुकला के छात्रों का दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ। इस समारोह में वरिष्ठ वास्तुविशारद गिरीश दोशी ने छात्रों को बहुमूल्य मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि वास्तुशास्त्र केवल निर्माण नहीं है, बल्कि यह संवेदनशीलता, रचनात्मकता और भावनाओं का प्रतीक है।
दोशी ने वास्तुकला के क्षेत्र में अपने चार दशकों के सफर के अनुभव साझा किए। उन्होंने छात्रों को अपने काम की दुर्लभ तस्वीरें भी दिखाईं। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि असफलता से न डरें, बल्कि श्रद्धा, धैर्य और अभ्यास से सफलता और आनंद प्राप्त करें। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इमारत का निर्माण करते समय जगह, सूरज की रोशनी, बगीचा और डिजाइन जैसी बातों पर विचार करना कितना महत्वपूर्ण है। दोशी ने यह भी उल्लेख किया कि फेरो-सीमेंट ने वास्तुकला के क्षेत्र में विविधता लाई है।
इस अवसर पर वास्तुविशारद गौरव भंगारे ने स्नातक छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए उन्हें कम से कम तीन साल तक अनुभवी वास्तुविशारद के साथ काम करना चाहिए। इस कार्यक्रम में डॉ. स्मिता सूर्यवंशी, अजय हरळे, रुजुता पाठक, लक्ष्मण तोरगळे, किसन काळे, प्रा. शिवा शिशोविया, प्रा. दक्षा देशमुख, ज्ञानेश्वर लांडगे, पद्माताई भोसले, विठ्ठल कळभोर, शांताराम गरडे, हर्षवर्धन पाटील, नरेंद्र लांडगे, अजिंक्य कळभोर, डॉ. गिरीश देसाई सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।















