बहन का गला घोंटकर हत्या करने के मामले में अदालत ने आरोपी सुबोजित बासू को उम्रकैद की सजा सुनाई है। करीब 16 साल पहले हिंजवडी पुलिस स्टेशन की सीमा में हुए इस मामले में पुलिस की जांच और अदालती पैरवी निर्णायक साबित हुई।
यह घटना 14 अप्रैल 2010 की तड़के शिंदेनगर स्थित अपराजिता सोसायटी में हुई थी। व्यापार में हुए नुकसान से निराश होकर आरोपी ने आत्महत्या का प्रयास किया था। उसकी 23 वर्षीय बहन ने इसका विरोध किया, तो उसने उसका गला घोंटकर हत्या कर दी और उसके बाद अपने हाथ की नस काटकर आत्महत्या की कोशिश की।
तत्कालीन जांच अधिकारी पुलिस उपनिरीक्षक आर. टी. पवार ने सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपपत्र दायर किया था। पुलिस आयुक्त विनय कुमार चौबे के निर्देशानुसार इस मामले को "स्टार केस" के रूप में चुना गया और इसकी जिम्मेदारी वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बालाजी पांढरे को सौंपी गई। सरकारी वकील लीना पाठक ने सरकार का पक्ष रखा।
सबूतों और गवाहियों पर विचार करते हुए अदालत ने आरोपी को भादंवि (आईपीसी) की धारा 302 के तहत उम्रकैद और 10 हजार रुपये का जुर्माना, तथा जुर्माना न भरने पर एक महीने के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है।










