फाउंडेशन के ज्ञापन के अनुसार, शहर में पालतू कुत्तों की संख्या बहुत अधिक है, लेकिन महानगरपालिका के पास विधिवत पंजीकृत कुत्तों की संख्या बेहद कम है। इसमें कहा गया है कि कई कुत्तों का टीकाकरण और देखभाल ठीक से न होने के कारण रेबीज का खतरा बढ़ जाता है।

झोपड़पट्टियों, चॉलों, पुनर्वास इमारतों के साथ-साथ सड़क किनारे की दुकानों, गैरेज और होटलों के आसपास कुत्तों को खुला छोड़ दिया जाता है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि इससे वरिष्ठ नागरिकों, छोटे बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा पैदा हो रहा है और कुत्तों के झुंड के कारण दुर्घटनाएं भी हो रही हैं।

फाउंडेशन के संस्थापक-अध्यक्ष गणेश जगताप ने कहा कि कुत्ते पालने के नियम केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें वास्तव में लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक नागरिकों की सुरक्षा का मसला हल नहीं होगा।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि महानगरपालिका इस संबंध में कदम नहीं उठाती है, तो न्यायालय में गुहार लगाई जाएगी। पालतू कुत्तों के लिए महानगरपालिका का लाइसेंस लेना और नियमित टीकाकरण कराना अनिवार्य है।