कार्यशाला में प्राचार्या ज्योतिका मलकानी और शिक्षकों ने छात्रों को मूर्ति बनाने की प्रक्रिया में मदद की। छात्रों ने विभिन्न आकारों, डिज़ाइनों और सजावट का उपयोग कर अपनी कल्पनाशीलता को आकार दिया।
छात्रों ने अपने हाथों से गणपति की मूर्ति बनाने के आनंद का अनुभव किया। इसके साथ ही, उन्हें यह भी समझाया गया कि पर्यावरण-अनुकूल सामग्री का उपयोग कर गणेशोत्सव मनाना क्यों आवश्यक है।
स्कूल के अध्यक्ष संदीप काटे ने कहा कि गणेशोत्सव संस्कृति और परंपरा से जुड़ा त्योहार है, लेकिन इसे मनाते समय पर्यावरण का ध्यान रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कम उम्र में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा की जाए, तो वह जीवन भर बनी रहती है।
स्कूल प्रबंधन ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से छात्रों को रचनात्मकता के साथ-साथ प्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी मिलता है।














