स्वदेशी तकनीक से बैटरी सेल विकसित करने वाला केंद्र अब चिखली में स्थापित होने जा रहा है। यह केंद्र सीओईपी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के चिखली स्थित रिसर्च पार्क में बनेगा, जिसके लिए विश्वविद्यालय ने जेएसडब्ल्यू समूह की कंपनी जेएसडब्ल्यू प्रोजेक्ट्स के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। दावा किया गया है कि बैटरी के प्रोटोटाइप तैयार करने और छोटे पैमाने पर उनका परीक्षण करने वाला यह देश का पहला केंद्र होगा।
इस परियोजना का काम दो चरणों में होगा और कुल निवेश 800 करोड़ रुपये से अधिक होगा। शुरुआत में एक शोध केंद्र स्थापित किया जाएगा। वहां लिथियम-आयन, सोडियम-आयन और अन्य नए रसायनों से बनने वाले सेल की डिजाइन, कंप्यूटर सिमुलेशन और प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे। अगले चरण में तैयार सेल की गुणवत्ता की जांच कर उन्हें मान्यता देने वाला केंद्र शुरू होगा।
इस करार पर जेएसडब्ल्यू समूह की ओर से कार्यकारी उपाध्यक्ष नरेश ललवाणी और विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव डॉ. डी. एन. सोनावणे ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर कुलपति डॉ. सुनील भिरुड और विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
अनुमान है कि इस केंद्र के कारण बैटरी से संबंधित उद्योग में एक हजार से अधिक नौकरियां पैदा होंगी। इलेक्ट्रिक वाहनों, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और गैर-पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र को भी इसका लाभ मिलेगा। जेएसडब्ल्यू समूह के अध्यक्ष सज्जन जिंदल ने कहा कि भारत की गर्म जलवायु में टिकने वाले सेल को देश में ही डिजाइन कर उनका परीक्षण किया जा सकेगा, इसलिए यह साझेदारी महत्वपूर्ण है।
कुलपति डॉ. सुनील भिरुड ने कहा कि इससे विश्वविद्यालय के छात्रों को नई बैटरी तकनीक पर प्रत्यक्ष रूप से काम करने का अवसर मिलेगा और शोध को भी बढ़ावा मिलेगा।











