डॉ. विजयकुमार पाटिल ने दावा किया है कि पिछले ढाई साल से इन मशीनों में तकनीकी खराबी, सर्वर की समस्या और डेटा ट्रांसफर में बाधाएं आ रही हैं। उन्होंने बताया कि मशीनें बंद होने पर हाजिरी के लिए फिर से हाथ से लिखे जाने वाले रजिस्टर का सहारा लिया जा रहा है।
उनका कहना है कि इससे ईमानदार कर्मचारियों को लेट मार्क या गैरहाजिरी का नुकसान उठाना पड़ सकता है, साथ ही ठेका मजदूरों की संख्या में कागजी हेराफेरी होने का भी खतरा है।
अनुबंध के अनुसार मशीनों के रखरखाव की जिम्मेदारी ठेकेदार की है और मशीन 24 से 48 घंटे से अधिक समय तक बंद रहने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है। हालांकि, आरोप लगाया गया है कि खराबी के बाद तकनीशियन समय पर नहीं आते हैं और जुर्माने की कोई कार्रवाई भी नहीं की जाती है।
पाटिल ने मांग की है कि परियोजना के खर्च, निविदा प्रक्रिया, मशीनों की गुणवत्ता, सर्वर व्यवस्था और ठेकेदार के कामकाज का स्वतंत्र ऑडिट कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। इस मामले में अभी तक महानगरपालिका का पक्ष सामने नहीं आया है।







