बच्चा दो-ढाई साल का होने के बावजूद बोलता नहीं है, बुलाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता, ऐसे समय में जांच करने पर जन्मजात बधिरता (बहरापन) होने की बात सामने आती है। ऐसे बच्चों को सुनने और बोलने में सक्षम बनाने के लिए 'कॉक्लिया पुणे फॉर हियरिंग एंड स्पीच' नामक स्वयंसेवी संस्था 1998 से काम कर रही है। पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका (मनपा) के यशवंतराव चव्हाण स्मृति अस्पताल (वाईसीएम) में अश्विनी मेडिकल फाउंडेशन के सहयोग से संस्था का केंद्र चलता है।

संस्था के माध्यम से अब तक लगभग 400 बच्चों की सर्जरी हो चुकी है और 1,200 बच्चों का इलाज किया गया है। इनमें से कई बच्चे अब सुनने और बोलने लगे हैं और कुछ ने उच्च शिक्षा प्राप्त कर नौकरी-व्यवसाय भी शुरू कर दिया है, यह जानकारी संस्था के कार्यकारी ट्रस्टी डॉ. अविनाश वाचासुंदर ने दी।

डॉ. वाचासुंदर ने बताया कि तीन साल की उम्र से पहले इलाज होने पर बच्चा सुन सकता है। इसके बाद छह साल तक स्पीच और लैंग्वेज (वाणी और भाषा) का प्रशिक्षण तथा पूर्व-प्राथमिक शिक्षा दी जाती है और आगे बच्चों को नियमित स्कूल में प्रवेश मिल जाता है। बच्चों को घर पर भी अभ्यास करने में आसानी हो, इसलिए उनकी माताओं को ही प्रशिक्षित किया जाता है।

प्रशिक्षक सीमा कुलकर्णी ने जानकारी दी कि वाईसीएम केंद्र में सोमवार से शुक्रवार सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक शून्य से छह साल के बच्चों को खेल के माध्यम से भाषा और वाणी का प्रशिक्षण दिया जाता है।

पिंपरी के वाईसीएम सहित राजगुरुनगर, मंचर, नारायणगांव, दौंड, पिरंगुट-उरवडे (आवासीय केंद्र) और सिंधुदुर्ग जिले के कुडाल में संस्था के केंद्र हैं। संस्था के पास लगभग 50 प्रशिक्षक हैं, जिनमें 35 माता-प्रशिक्षक शामिल हैं।