15 अगस्त 1947 को देश स्वतंत्र हुआ, लेकिन हैदराबाद रियासत की जनता अगले 13 महीनों तक निजाम के शासन के अधीन रही। 17 सितंबर 1948 को मराठवाड़ा निजाम के शासन से मुक्त हुआ। इस संघर्ष में शहीदों के बलिदान को याद रखने के लिए, केंद्र सरकार ने राजपत्र के माध्यम से हर साल इस दिन को मनाने का निर्णय लिया है।
शहर में विभिन्न राष्ट्रीय दिवसों, महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि के अवसर पर मनपा स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लेकिन अरुण पवार ने सवाल उठाया है कि 17 सितंबर के लिए शहीदों को श्रद्धांजलि, व्याख्यान, इतिहास प्रदर्शनी या छात्रों के लिए जन जागरूकता गतिविधियां क्यों नहीं आयोजित की जाती हैं।
पवार ने कहा कि यह दिन केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की एकता के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इसलिए, इसे किसी भी राजनीतिक दृष्टिकोण से न देखकर इतिहास और राष्ट्रीय एकता के दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए।
उन्होंने मनपा को सुझाव दिया है कि स्कूलों और कॉलेजों में व्याख्यान, निबंध प्रतियोगिताएं, इतिहास प्रदर्शनी, स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों का सम्मान और जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने से नई पीढ़ी को इस संघर्ष की जानकारी मिलेगी। इस संबंध में मनपा की प्रतिक्रिया अभी उपलब्ध नहीं है।










