एमआईडीसी भोसरी पुलिस थाने में 3 अप्रैल 2026 को यह मामला दर्ज किया गया था। पुलिस उपनिरीक्षक चैत्राली भिसे ने जांच कर महज 30 दिनों में न्यायालय में आरोप पत्र दायर किया।
अभियोजन पक्ष ने मुकदमे की सुनवाई तेजी से करने का अनुरोध किया और न्यायालय ने इसे स्वीकार कर लिया। सुनवाई पूरी होने के बाद 22 सितंबर को न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया।
न्यायालय ने बीएनएस की धारा 64(1) और 65(2) के तहत 20-20 साल का कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना, जबकि पॉक्सो कानून की धारा 4 और 6 के तहत 20-20 साल के कारावास की सजा सुनाई। अन्य धाराओं के तहत भी कारावास और जुर्माने की सजा दी गई है।
विशेष लोक अभियोजक स्मिता चौगुले ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की। पीड़िता की पहचान सुरक्षित रखने के लिए कानून के अनुसार आरोपी और पीड़िता से संबंधित विवरण प्रकाशित नहीं किए गए हैं।














